देहरादून, 18 जून : राज्य आंदोलनकारीयों को प्रदत 10% क्षैतिज आरक्षण की बहाली के पश्चात भी 2012 से 2015 के बीच परीक्षा पास किए अभ्यार्थियों को नियुक्ति न देने के चलते उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संयुक्त मंच ने अपने धरने के चौथे दिन भी जारी रहा।
धरने का समर्थन करने पहुंचे आंदोलनकारी मंच के केशव उनियाल व उक्रांद के पूर्व प्रवक्ता मनोरथ ध्यानी ने कहा कि वह आंदोलनकारियों के सब्र का इम्तहान ना ले। उम्र के 55 बसंत पार कर चुके यह लोग पहले ही अपने हिस्से के12 साल सरकार और न्यायालय की लड़ाई में गंवा चुके है।अब उनके हिस्से के जो 2-4 साल जो बचे हैं कम से कम वही उन्हें नियुक्ति नॉकरी की सौगात प्रदान कर दे।
रामनगर से पहुँचे आंदोलनकारी साथी भगवती कुकरेती ने कहा कि जिस तरह सरकार ने आज आश्रितों के देरी से बने प्रमाण पत्र पर छूट प्रदान की है। इसी तरह सरकारी उदासीनता का शिकार वह भी हुए हैं। राज्यान्दोलनकरियों के साथ हो रहा यह भेदभावपूर्ण रवैया बेहद शर्मनाक है।
सयुंक्त मंच के संयोजक अम्बुज शर्मा ने कहा कि मुख्य सचिव राधा रतूड़ी के रहते 7 राज्यन्दोलनकरियों को नियुक्ति प्रदान कर दी गई थी मगर उनके रिटायर होने के बाद एक भी आंदोलनकारी की नियुक्ति ना होना, नौकरशाहों की पहाड़ विरोधी मंशा को दर्शाता है। जबकि इस श्रेणी में लगभग 25 के करीब लोग बचे हुए हैं।
सभा के अंत में सभी आंदोलनकारियों ने आज की कैबिनेट में आंदोलनकारी आश्रितों के पक्ष में लिये गये निर्णय की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए मांग की कि जिस तरह उन्होंने आश्रितों के मामले में निर्णय लिया उसी भाँति 2012-15 के राज्यान्दोलनकरियों के मामले में एक कैबिनेट कमेटी बनाकर शीघ्रता से मामले का निस्तारण करें।
आज धरने में बैठने वाले लोगों में राम किशन,अम्बुज शर्मा, भगवती प्रसाद कुकरेती,सुनीता ठाकुर बैठे व उनके समर्थन पर पहुंचने वाले लोगों में प्रभात डंडरियाल, विशंभर दत्त बौठियाल, भुवनेश्वरी देवी, सुरेश कुमार, शांति शर्मा, अनुराधा मैंदोला,सुशील चमोली, धर्मपाल सिंह नेगी,अश्वनी कुमार, राजीव जुगराण, ओपी उनियाल, गीता नेगी, , देवेंद्र सती,सुमित थापा बंटी,कौसल्या देवी, मनोज कुमार आदि मौजूद रहे।
