आज दिनॉक 5 जून 2025 तदानुसार 23 प्रविष्ठे जेष्ठ का श्रीबद्रीश दैनिक पंचांग।

संवत्:-2082(सिद्धार्थी-संवत्सर), शाका:-1947.
युगाब्द:-5127, रवि:-उत्तरायण/उत्तरगोल. ऋतु:-ग्रीष्मऋतु !!
मास:-जेष्ठ !! पक्ष:-शुक्लपक्ष !!
तिथि:-दशमी/श्रीगंगा-दशहरा पर्व हरिद्वार !!
वार:-बृहस्पतिवार !!
नक्षत्र:-हस्त !!
योग:-सिद्धि/व्यतीपात !!
करण:-तैतिल/गर !!
दिशाशूल:-दक्षिणदिशा !! पंचक-विचार:-पंचक 16 जून दोपहर 1:10 से 20 जून रात्रि 9:45 तक रहेंगें !!

गंडमूल-विचार:-गंडमूल आजकल नहीं हैं !! राहुकाल:-दोपहर 1:30 से 3:00 तक स्थूल (केवल द.भा. मे विचार्णिय) !!

🪴गुरु-बीजमंत्र:-ओम ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरवे नम:।

🪴देवमंत्री विशालाक्षी सदा लोकहिते रत:। 🪴🪴अनेक-शिष्य-संपूर्ण: पीड़ां दहतु मे गुरु:।।

🪴🎗️ आगामी विशेष व्रत-त्यौहार 🎗️🪴
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निर्जला एकादशी व्रत:-शुक्रवार 6 जून
वटसावित्री व्रत/श्रीसत्यनारायण व्रत:-मंगलवार 10जून
जेष्ठ पूर्णिमा/627वीं सन्त कबीर जयन्ती:-बुधवार 11 जून
श्रीगणेश चतुर्थी:-शनिवार 14 जून
आषाढ़ संक्रान्ति:-रविवार 15 जून
विश्वयोग-दिवस/योगनी एकादशी व्रत:-शनिवार 21 जून
मास शिवरात्रि व्रत:-सोमवार 23 जून

आषाढ़ आमावस:-बुधवार 25 जून

🙏…….|| आजका विचार अवश्य पढ़ें ||…….🙏

ओम नमो गंगायै विश्वरुपिणी नारायणी नमोनम:
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🧜🧜🧜 गंगा दशहरा व्रत कथा 🧜🧜🧜
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एक बार महाराज सगर ने व्यापक यज्ञ किया। उस यज्ञ की रक्षा का भार उनके पौत्र अंशुमान ने संभाला। इंद्र ने सगर के यज्ञीय अश्व का अपहरण कर लिया। यह यज्ञ के लिए विघ्न था। परिणामतः अंशुमान ने सगर की साठ हजार प्रजा लेकर अश्व को खोजना शुरू कर दिया। सारा भूमंडल खोज लिया पर अश्व नहीं मिला।

फिर अश्व को पाताल लोक में खोजने के लिए पृथ्वी को खोदा गया। खुदाई पर उन्होंने देखा कि साक्षात्‌ भगवान ‘महर्षि कपिल’ के रूप में तपस्या कर रहे हैं। उन्हीं के पास महाराज सगर का अश्व घास चर रहा है। प्रजा उन्हें देखकर ‘चोर-चोर’ चिल्लाने लगी।

महर्षि कपिल की समाधि टूट गई। ज्यों ही महर्षि ने अपने आग्नेय नेत्र खोले, त्यों ही सारी प्रजा भस्म हो गई। इन मृत लोगों के उद्धार के लिए ही महाराज दिलीप के पुत्र भगीरथ ने कठोर तप किया था।

भगीरथ के तप से प्रसन्न होकर ब्रह्मा ने उनसे वर मांगने को कहा तो भगीरथ ने ‘गंगा’ की मांग की। इस पर ब्रह्मा ने कहा- ‘राजन! तुम गंगा का पृथ्वी पर अवतरण तो चाहते हो? परंतु क्या तुमने पृथ्वी से पूछा है कि वह गंगा के भार तथा वेग को संभाल पाएगी? मेरा विचार है कि गंगा के वेग को संभालने की शक्ति केवल भगवान शंकर में है। इसलिए उचित यह होगा कि गंगा का भार एवं वेग संभालने के लिए भगवान शिव का अनुग्रह प्राप्त कर लिया जाए।

महाराज भगीरथ ने वैसे ही किया। उनकी कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्माजी ने गंगा की धारा को अपने कमंडल से छोड़ा। तब भगवान शिव ने गंगा की धारा को अपनी जटाओं में समेटकर जटाएं बांध लीं। इसका परिणाम यह हुआ कि गंगा को जटाओं से बाहर निकलने का पथ नहीं मिल सका।

अब महाराज भगीरथ को और भी अधिक चिंता हुई। उन्होंने एक बार फिर भगवान शिव की आराधना में घोर तप शुरू किया। तब कहीं भगवान शिव ने गंगा की धारा को मुक्त करने का वरदान दिया। इस प्रकार शिवजी की जटाओं से छूट कर गंगाजी हिमालय की घाटियों में कल-कल निनाद करके मैदान की ओर मुड़ी।

इस प्रकार भगीरथ पृथ्वी पर गंगा का वरण करके बड़े भाग्यशाली हुए। उन्होंने जनमानस को अपने पुण्य से उपकृत कर दिया। युगों-युगों तक बहने वाली गंगा की धारा महाराज भगीरथ की कष्टमयी साधना की गाथा कहती है। गंगा प्राणीमात्र को जीवनदान ही नहीं देती, मुक्ति भी देती है। इसी कारण भारत तथा विदेशों तक में गंगा की महिमा गाई जाती है।

पाप धोती है सब तप हरती है गंगा, धरती को सींच-हरा-भरा करती है गंगा, आचमन मात्र से, तन-मन पवित्र करती है गंगा, और जीव जंतु सबको तृप्ति करती है गंगा।।
जीवन दायिनी मां-गंगा की अविरल धारा से मानवता के कल्याण का क्रम निरंतर रहे। मां गंगा सभी की मनोकामनाएं पूर्ण करें यही प्रार्थना है !!
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सभी अखण्ड सनातन भारतवासियों को गंगा दसहरा पर्व की मंगलमयी हार्दिक शुभकामनाएं।
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