देहरादून/उत्तराखंड: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता, विद्वान शोधकर्ता और ‘टिहरी की जनक्रांति’ जैसी कालजयी ऐतिहासिक पुस्तक के लेखक डॉ. गिरिधर पंडित का 82 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। उनके निधन से उत्तराखंड के वैचारिक, राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में गहरा सन्नाटा पसर गया है। उनकी कमी की भरपाई नामुमकिन बताई जा रही है।
डॉ. गिरिधर पंडित का जन्म 9 अप्रैल 1944 को देवप्रयाग में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा देवप्रयाग में हुई। इसके बाद उन्होंने देहरादून के डी.ए.वी. और गुरु रामराय कॉलेज से विज्ञान में स्नातक किया। उन्होंने कुमाऊं विश्वविद्यालय के अल्मोड़ा कैंपस से राजनीति विज्ञान में एम.ए. और पीएच.डी. की उपाधि हासिल की।
डॉ. गिरिधर पंडित पहले ऐसे शोधकर्ता थे, जिन्होंने टिहरी की निरंकुश राजशाही के खिलाफ हुए ऐतिहासिक जन-विद्रोह पर बारीक और प्रामाणिक शोध किया। उनका शोधग्रंथ ‘टिहरी की जनक्रांति’ वर्ष 2023 में प्रकाशित हुआ, जिसे अद्भुत ऐतिहासिक ग्रंथ माना जाता है। वे 10 वर्ष तक देवप्रयाग महाविद्यालय के प्राचार्य रहे। कम्युनिस्ट पार्टी के बड़े नेता के रूप में वे अध्यापन के साथ-साथ लगातार जनआंदोलनों से जुड़े रहे। देवप्रयाग में उन्होंने उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन का नेतृत्व भी बड़ी शिद्दत से किया।
सीपीएम उत्तराखंड ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे अपूरणीय क्षति बताया है और कहा है कि उनके योगदान को सदैव याद रखा जाएगा।
डॉ. गिरिधर पंडित भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका बेजोड़ संघर्ष, बेबाक कलम और अन्याय के खिलाफ न झुकने की उनकी आदत हमेशा प्रेरणा देती रहेगी।
उत्तराखंड के इस महान क्रांतिकारी को समस्त जनसंवाद परिवार की तरफ़ से लाल सलाम।
