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उत्तराखंड

उत्तराखंड में हेली सेवा की सुरक्षा पर खड़े हो रहे सवाल?

Byjansamvad bureau

June 17, 2025 #प्रसंग में

देहरादून, 17 जून: उत्तराखंड में चार धाम यात्रा के लिए जाने वाले लोगों की सुविधा कलिए हेली सेवा शुरू की गई थी। मकसद था कम पैसों में लोगों को जल्दी और आरामदायक दर्शन की सेवा उपलब्ध कराना। लेकिन ऐसा लगता है कि इस हेली सेवा में आराम कम और संकट ज्यादा है।दरअसल पिछले सिर्फ 40 दिनों में चार धाम यात्रा मार्ग पर 5 हेलीकॉप्टर दुर्घटनाएं हुई हैं। लेकिन जिम्मेदार हैं कि सुध लेने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। फिलहाल चार धाम यात्रा हेलीकॉप्टर सर्विस पर रोक लगा दी गई और इसके संचालन के लिए सख्त नियम बनाए जाने की बात कही जा रही है।चारधाम यात्रा शुरू होने के बाद हेलीकाप्टर दुर्घटना का पांचवा बड़ा हादसा होने के बाद अब देहरादून मे एअर ट्रैफिक कंट्रोल का निर्णय हुआ है जो देर से लिया गया सही निर्णय है, लेकिन रविवार को केदारनाथ हादसे ने हेली सेवाओं पर प्रश्न चिन्ह तो खड़ा कर ही दिया, इस हादसे के वाद सरकार के स्तर से सख्त सन्देश देने के लिए जिस प्रकार से ताबड़तोड़ फैसले लिए जा रहे इससे ऐसा लग रहा है कि सरकारें भी हादसों के ही इंतजार मे रहती है।चारधाम यात्रा शुरू होने के बाद 8 मई से 15 जून के बीच पांच हेली हादसे हो चुके हैं, 8मई को उत्तरकाशी के गंगनानी मे हेलीकाप्टर दुर्घटना ग्रस्त हुआ और 6 तीर्थयात्रियों की दर्दनाक मौत हुई, रविवार को केदारनाथ हादसे के बाद हेली सेवाओं के संचालन के लिए जिस प्रकार के निर्णय लिए जा रहे हैं यदि 8मई को उत्तरकाशी की घटना के बाद ये निर्णय ले लिए जाते तो क्या सात लोगों की जान बचाई जा सकती थी? यह सवाल आम जनमानस के मन मे तैर रहा है। केदारनाथ हादसे के बाद पहला निर्णय कॉमन कमांड सेंटर बनाने का हुआ है तो क्या उत्तराखंड मे हेली सेवाओं को शुरू करने से पहले कॉमन कमांड सेंटर नहीं बनना चाहिए था?  दूसरा निर्णय हुआ है कि अब हिमालय मे उड़ान के लिए अनुभवी पायलटों को ही इजाजत दी जाएगी तो क्या अब तक उच्च हिमालय मे उड़ान भर रहे अनुभवी पायलट नहीं थे? तीसरा निर्णय सख्त एसओपी लागू करने का भी हुआ है तो उत्तराखंड मे क्या हेलीकाप्टर बिना किसी एसओपी के ही संचालित हो रहे थे? यह सब प्रश्न हेलीकाप्टर हादसों मे अपनों को खो चुके परिवार तो पूछेंगे ही, केदारनाथ हादसे के बाद लिए जा रहे निर्णयों पर उत्तराखंड सहित देशभर के लोग नजर रखे हुए हैं। यह भी सच है कि हादसा कभी भी किसी के साथ हो सकता है, लेकिन हादसे के तुरन्त बाद जिस प्रकार से सुरक्षात्मक निर्णय लिए जाते है इससे लोगों के मन मे सवाल उठना लाजिमी है कि यदि इस प्रकार के निर्णयों से हादसे कम या रोके जा सकते हैं तो यह हादसों से पहले क्यों नहीं लिए जाते? केदारनाथ हादसे के बाद एक महत्वपूर्ण निर्णय एटीसी -एअर ट्रैफिक कंट्रोल का हुआ है जो अब तक नहीं था, एटीसी का मतलब ही वायु यातायात नियंत्रण है, एटीसी ही वायु यातायात के सुरक्षित एवं व्यवस्थित करने का प्रबंधन करती है। ऐसा सुरक्षित प्रबंधन भी हेली सेवाओं को शुरू करने से पूर्व नहीं किया गया। किसी भी राज्य अथवा केन्द्र सरकार की पहली जिम्मेदारी अपने नागरिकों की सुरक्षा करना है और नागरिकों की सुरक्षा के लिए हादसों व मौतों का इंतजार किए बिना जो भी बड़े निर्णय लिए जाने हो वह किसी भी योजना को शुरू करने से पहले ले लिए जानेचाहिए।उत्तराखंड मे चारधाम यात्रा ही राज्य की आर्थिकी की रीढ़ है, हर वर्ष शीतकाल मे चारों धामों के कपाट बन्द होने के बाद से ही आगामी यात्रा सीजन की तैयारियों को लेकर बैठकों का दौर शुरू हो जाता है, वसंत पंचमी आते आते दर्जनों बैठकें कई स्तर पर हो जाती है, राज्य में एक के बाद एक हेलीकॉप्टर क्रैश के पीछे सरकारी सिस्टम की वह लापरवाही भी जिम्मेदार है, जिसमें चिंता केवल हेली कंपनियों को ठेका देने तक रहती है। उसके बाद हेली ऑपरेटर क्या कर रहे हैं और कैसे हेली सेवाओं का संचालन कर रहे हैं और यात्री कितनी मुश्किलें झेल रहे हैं, उससे सिस्टम को कोई सरोकार नहीं है। इस साल आठ मई से 15 जून तक चार बार हेलीकॉप्टर हवा में ही खराब हो गए। दो हादसों में एक मासूम बच्ची समेत 13 लोगों को जान गवांनी पड़ी है। राज्य की हेली सेवाओं और व्यवस्थाओं की पड़ताल की तो कुछ चौंकाने वाले पहलू सामने आए। राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए चार धाम यात्रा रूट पर हेलीकॉप्टर सेवाओं पर अस्थाई रूप से रोक लगाने का निर्णय लिया गया।आर्यन का जो हेली क्रैश हुआ, उसके पीछे दो हेलीकॉप्टर और आ रहे थे। आर्यन के हेलीकॉप्टर पायलट को गौरीकुंड खर्क में आते ही विजिबिलिटी शून्य मिली। आशंका जताई जा रही है कि पायलट ने हेली को इमरजेंसी लैंडिग के लिए लैंड करने का प्रयास किया होगा किंतु इसी बीच हेली क्रैश हो गया। अब, सवाल यह उठ रहा है कि आखिर क्या हेली दुर्घटनाओं को देखते हुए केदारघाटी में एयर ट्रैफिक कंट्रोल और डबल इंजन के हेलीकॉप्टरों के संचालन पर निर्णय लिया जा सकेगा या फिर इसी तरह हेली सेवाएं भगवान भरोसे संचालित होती रहेंगी।एयर ट्रैफिक कंट्रोल के हैं कई फायदेएटीसी हेलीकॉप्टरों की आपस में दूरी बनाने में मददगार ही नहीं होती है बल्कि टकराव से बचने, खराब मौसम की सही जानकारी मिलने में सबसे ज्यादा फायदेमंद होती है। हवाई यातायात के लिए कौन से क्षेत्र आरक्षित हो सकते हैं यह सब कुछ एटीसी ही तय करता है। इस घटना को सूत्रों से मिली जानकारी से भी यही पता चला है कि पायलट का आपस में इंटर कम्युनिकेशन कॉल के जरिए सम्पर्क हो रहा था।चारधाम यात्रा मार्ग पर ज्यादातर सिंगल इंजन वाले हेलीकॉप्टर ही संचालित किए जा रहे हैं। एक हेलीकॉप्टर की जिम्मेदारी एक ही पायलट पर होती है। युकाडा के अधिकरियों के अनुसार को-पायलट की व्यवस्था केवल डबल इंजन वाले हेलीकॉप्टर में होती है। यहां सवाल यह है कि सिंगल इंजन के हेलीकॉप्टर के संचालन को अनुमति दी ही क्यों जा रही है?  हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह हेलीकॉप्टर सेवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस नीति बनाए, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।कपाट खुलने से ठीक पहले चाक चौबंद व्यवस्था का दावा भी कर दिया जाता है और कपाट खुलने के बाद हादसों की शुरुवात हो जाती है। उत्तरकाशी एवं केदारनाथ जैसे हादसों की पुनरावृति न हो इसके लिए राज्य सरकार कठोर निर्णय की ओर बढ़ रही है, उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार के स्तर से लिए जाने वाले निर्णयों का कड़ाई से पालन हो और जीवन मे एक बार चारधाम यात्रा पूर्ण करने की कामना लेकर आ रहे श्रद्धालु सकुशल अपनों के बीच पहुँच सके। उत्तराखंड की हेली सेवाएं एक बार फिर सुरक्षा संकट के दौर में हैं. खराब मौसम, तकनीकी खामियां और मानवीय लापरवाही जैसी वजहों से बार-बार लोगों को जानें जा रही हैं। सरकार और DGCA को इन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत है, ताकि तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

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