देहरादून। प्रतिष्ठित संस्था उद्गार साहित्यिक एवं सामाजिक मंच ने नागपुर के वरिष्ठ साहित्यकार, युगधारा फाउंडेशन लखनऊ के संरक्षक,राष्ट्रीय मासिक पत्रिका युगधारा समय की के प्रधान संपादक डॉ॰ रामकृष्ण विनायक सहस्रबुद्धे जी को ’उद्गार श्री’ सम्मान से सम्मानित किया।
देहरादून में उद्गार साहित्यिक मंच देहरादून एवं युगधारा फाउंडेशन उत्तराखण्ड इकाई, देहरादून के अध्यक्ष एवं ख्याति लब्ध गीतकार डॉ॰ शिवमोहन सिंह ने अपने निवास पर नागपुर से पधारे युगधारा फाउंडेशन (लखनऊ) के संरक्षक एवं युगधारा साहित्यिक मासिक पत्रिका के प्रधान संपादक सुप्रसिद्ध कवि रामकृष्ण विनायक सहस्रबुद्धे जी के सम्मान में एक काव्य संध्या का आयोजन किया, जिसमें दोनों संस्थाओं के अध्यक्ष डॉ॰ शिव मोहन सिंह जी , पवन शर्मा जी,(सचिव उद्गार एवं उपाध्यक्ष युगधारा फाउंडेशन उत्तराखण्ड इकाई), नीरू गुप्ता श्मोहिनीश् जी (सचिव, युगधारा फाउंडेशन,उत्तराखण्ड इकाई ), मुख्य अतिथि प्रसिद्ध गीतकार डॉ.बुद्धिनाथ मिश्र, नवगीत के पुरोधा आ. असीम शुक्ल और संस्कृत हिन्दी के विद्वान प्रो. (डॉ.) रामविनय सिंह जी ने सहस्रबुद्धे को अंग वस्त्र ,माला,नारियल,सम्मान पत्र,पुस्तकें व पुष्पगुच्छ भेंट करके उद्गार श्री सम्मानष् से सम्मानित किया। आ.सहस्त्रबुद्दे जी ने साहित्य को अपनी २० से भी ज्यादा प्रकाशित पुस्तकों से समृद्ध किया है। आप बहुत अच्छे लेखक,कवि व शायर हैं जो साहित्य की सभी विधाओं पर समान रूप से अपना अधिकार रखते हैं। बहुत ही सहज, सरल स्वभाव के धनी सहस्त्रबुद्दे जी ने इस सम्मान के लिए उद्गार संस्था का हृदय से आभार व्यक्त किया व अपनी ग़ज़लों, गीतों से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।
उद्गार साहित्यिक संस्था देहरादून में पिछले ३१ वर्षों से साहित्य के क्षेत्र में अग्रणी रूप से सक्रिय है।
वरिष्ठ गीतकार असीम शुक्ल जी ने काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता की व मुख्य अतिथि रहे डॉ.बुद्धि नाथ मिश्र जी।
पवन शर्मा जी ने गोष्ठी का शानदार संचालन किया। इस अवसर पर लखनऊ से पधारे वरिष्ठ कवि विजय शंकर मिश्र जी का भी सान्निध्य प्राप्त हुआ।
भारतीय परम्परा के अनुसार काव्य सन्ध्या का शुभारंभ सर्वप्रथम दीप प्रज्ज्वलन और मंत्रोच्चारण से हुआ। तत्पश्चात् नीरू गुप्ता श्मोहिनीश् ने सुमधुर माँ सरस्वती वंदना से काव्य संध्या की शुरुआत की। इसके बाद शहर के सभी जाने-माने उपस्थित वरिष्ठ गीतकारों, कवियों ने समसामयिक विषयों पर आधारित वीररस, शृंगार रस से ओतप्रोत एक से बढ़कर एक सुंदर गीत, ग़ज़ल ,मुक्तक छंद रचनाओं की स्तरीय प्रस्तुति से इस काव्य संध्या को सफलता के शिखर तक पहुँचाया। लखनऊ से पधारे सुप्रसिद्ध कवि विजय शंकर मिश्र जी ने लव-कुश पर आधारित बहुत सुंदर छंद व मुक्तक सुनाकर खूब तालियाँ बटोरी । मुख्य अतिथि बुद्धिनाथ मिश्र जी ने अपना बहु चर्चित गीत श्एक बार और जाल फेंक रे मछेरेश्, डॉ. (प्रो.) राम विनय सिंह जी ने संस्कृत और हिंदी में गीत श्बोलो कविते तुम कब आओगीश् व आ.असीम शुक्ल जी ने श्मैं चंदन वन के आसपास रहता हूँ, तुमको साँपों से भय न लगे तो आ जाना श् व शिवमोहन जी ने श्रृंगार गीत श्सिंदूरी सुख के साये में नम नयनों के कोर,साँझ उदासी ढूँढ़ रही है मुस्कानों की भोर।श्सुनाकर सबको सराबोर किया।
नीरू गुप्ता श्मोहिनीश् जी ने वीर रस पर अपना स्वरचित समसामयिक गीत श्बुद्ध कहे शुद्ध रहो,वीर कहे युद्ध करो,एक कहे प्राण तजो एक कहे धैर्य धरोश् ,दर्द गढ़वाली जी व उषा झा जी ने सुंदर ग़ज़ल सुना कर सबको निःशब्द कर दिया।
काव्य संध्या में पूर्व निदेशक भाषाविद डॉ. मुनिराम सकलानी , डॉ.एस. के. झा, सत्येंद्र शर्मा श्तरंगश्, संजय प्रधान, आनंद सिंह श्आनंदश्, नरेंद्र दीक्षित, दर्द गढ़वाली जी, नीरू गुप्ता श्मोहिनीश्, डॉ. उषा झा श्रेणुश्, श्रीमती उषा मिश्र ,श्रीमती निर्मला सिंह की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
अंत में संस्था के अध्यक्ष डॉ॰ शिवमोहन सिंह जी ने सभी का हृदय से आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगान के साथ उद्गार संस्था के इस सारस्वत कार्यक्रम की सुखद यादगार समाप्ती हुई।
