बात है कि भाजपा के नेता इस चुनाव परिणामों पर जश्न मना रहे हैं और खूब ढोल भी बजा रहे हैं लेकिन चुनाव परिणाम उनकी सोच के अनुकूल नहीं रहे हैं। यही कारण है कि अब भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट कह रहे हैं कि जिला पंचायत अध्यक्ष व ब्लाक प्रमुखों के अधिकांश पदों पर भाजपा प्रत्याशी जीतेंगे क्योंकि अधिकांश निर्दलीय जो चुनाव जीते हैं वह भाजपा के साथी हैं। उधर जश्न कांग्रेस मुख्यालय में भी मनाया जा रहा है। प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा का कहना है कि जो नतीजे आए हैं वह अत्यंत ही सुखद है।
देहरादून। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के नतीजे लगभग आ चुके हैं। सूबे के लोगों ने इस चुनाव में जिस तरह की सूझबूझ का परिचय दिया है और पढ़े लिखे युवाओं पर अपना भरोसा जताया है वह सूबे की भावी राजनीति को नई दिशा देगा।हाल ही में संपन्न हुए उत्तराखंड त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के नतीजों ने एक दिलचस्प राजनीतिक तस्वीर पेश की है। कोई भी एक दल स्पष्ट रूप से विजेता नहीं कहा जा सकता, जिसके चलते भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस, दोनों ही अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। हालांकि, असली ताकत निर्दलीय उम्मीदवारों के हाथ में आ गई है, जो अब ‘किंगमेकर’ की भूमिका में हैं।
चुनाव परिणामों के मुख्य बिंदु:
- किसी को स्पष्ट बहुमत नहीं: जिला पंचायत की 358 सीटों में से बीजेपी समर्थित 115 और कांग्रेस समर्थित 72 उम्मीदवार जीते हैं। लगभग 120 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है, जिससे जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुखों के चुनाव में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है।
- दोनों दलों के अपने-अपने दावे:
- बीजेपी: प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का दावा है कि अधिकांश निर्दलीय विजेता बीजेपी के ही समर्थक हैं, इसलिए पार्टी अधिकांश जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख पद पर काबिज होगी।
- कांग्रेस: प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा इन नतीजों को अपनी पार्टी के लिए “अत्यंत सुखद” बता रहे हैं। उनका मानना है कि यह परिणाम दिखाते हैं कि जनता बीजेपी के साथ नहीं है और यह 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत का संकेत है।
- दिग्गजों को लगा झटका: इन चुनावों में बीजेपी के कई बड़े नेताओं के परिजनों को हार का सामना करना पड़ा है। इनमें पूर्व विधायक राजेंद्र भंडारी की पत्नी रजनी भंडारी, विधायक सरिता आर्य के बेटे राहुल आर्य और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष बेला तौलिया जैसे नाम शामिल हैं। यह परिणाम पार्टी के जमीनी प्रदर्शन पर सवाल खड़े करते हैं।
- युवा और निर्दलीयों पर भरोसा: इन चुनाव परिणामों से यह भी स्पष्ट है कि मतदाताओं ने दलीय राजनीति से ऊपर उठकर स्थानीय मुद्दों और पढ़े-लिखे युवा उम्मीदवारों पर अधिक भरोसा जताया है।
संक्षेप में, पंचायत चुनाव के नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि जिला पंचायत अध्यक्षों और ब्लॉक प्रमुखों की कुर्सी का फैसला अब इस बात पर निर्भर करेगा कि 120 विजयी निर्दलीय उम्मीदवार किस पार्टी के पाले में जाते हैं।
इन चुनावों के नतीजे राज्य निर्वाचन आयोग की ऑफिशियल वेबसाइट secresult.uk.gov.in पर भी ऑनलाइन देखे जा सकते हैं।
