देहरादून में टिहरी बांध विस्थापितों के लिए हुए भूमि आवंटन में एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है, और जिला प्रशासन अब धोखाधड़ी करने वालों को जेल भेजने की तैयारी कर रहा है. जिलाधिकारी सविन बंसल ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी आवंटनों की विजिलेंस अथवा सी.बी.सी.आई.डी. से विशेष जांच कराने की संस्तुति शासन को भेज दी है.
क्या है पूरा मामला?
जिलाधिकारी के जनता दर्शन कार्यक्रम में टिहरी बांध पुनर्वास विभाग के खिलाफ लगातार शिकायतें आ रही थीं. इन शिकायतों में एक ही पैटर्न देखने को मिला: पुनर्वास के लिए आवंटित एक ही आवासीय भूखंड (प्लॉट) को धोखाधड़ी से दो अलग-अलग लोगों को आवंटित कर दिया गया, जिससे मौके पर विवाद, अवैध कब्जे और आपराधिक षड्यंत्र की स्थिति बन गई.
घोटाले के कुछ प्रमुख उदाहरण
- पुलमा देवी का मामला: विकासनगर के फुलसैंणी में एक ही भूखंड (सं. 44) को विभाग द्वारा दो बार अलग-अलग समय पर आवंटित कर दिया गया, जिससे विवाद उत्पन्न हुआ. जांच के बाद, दोबारा किए गए आवंटन को निरस्त करना पड़ा.
- सुमेर चंद का मामला: अटकफार्म गांव में भूखंड (सं. 28, 29) लक्ष्मी देवी और अन्य को आवंटित किए गए, लेकिन मौके पर जांच में किसी और व्यक्ति (कुंदन लाल जोशी) का कब्जा पाया गया, जबकि असल आवंटी भूमिहीन थे.
- अजय चौहान का मामला: अजबपुर कलां में एक भूखंड (सं. बी-205) पहले 2004 में इरशाद अहमद को आवंटित किया गया. बाद में, 2005 में वही भूखंड फतरू नामक व्यक्ति को फिर से आवंटित कर दिया गया. शिकायत के बाद इस दोहरे आवंटन को भी रद्द करना पड़ा.
प्रशासन की बड़ी कार्रवाई
- उच्च स्तरीय जांच की सिफारिश: इन गंभीर मामलों को देखते हुए, जिलाधिकारी सविन बंसल ने सिंचाई सचिव को पत्र लिखकर पुनर्वास विभाग द्वारा अब तक किए गए सभी भूमि आवंटनों की एक विशेष जांच एजेंसी से गहन जांच कराने की सिफारिश की है.
- दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई: इस जांच का मुख्य उद्देश्य घोटाले में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करना, विस्थापितों को न्याय दिलाना और दोषियों को दंडित करना है ताकि भविष्य में इस तरह की धोखाधड़ी न हो.
