देहरादून, 02 अक्टूबर, 2026 : आज ऑफिसर्स हॉस्टल, रेसकोर्स के सभागार में हिमालयी समाज, पर्यावरण, लोकजीवन, ग्रामीण पर्यटन, संस्कृति तथा विकास संबंधी विषयों पर केंद्रित हिन्दी मासिक पत्रिका “हिमालय संवाद” का लोकार्पण सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े शिक्षाविदों, साहित्यकारों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पर्यावरणविदों, शोधकर्ताओं , वैज्ञानिकों , पत्रकार, लेखक, कवि, टिप्पणीकार, पर्यावरणविद, फिल्म निर्माता , छायाकार , इतिहासकार, शिक्षाविद , नीति निर्माता, मीडिया कर्मियों तथा प्रबुद्ध नागरिकों ने सहभागिता की।
समारोह के दौरान वक्ताओं ने हिमालय के बढ़ते महत्व और उसके समक्ष उपस्थित चुनौतियों पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हिमालय केवल एक पर्वत श्रृंखला नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आजीविका, संस्कृति, जल स्रोतों और पर्यावरणीय संतुलन का आधार है। जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती आवृत्ति, अनियोजित विकास, पलायन, जैव विविधता के क्षरण और स्थानीय संसाधनों पर बढ़ते दबाव के कारण हिमालयी क्षेत्रों के सामने गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। इन परिस्थितियों में हिमालय से जुड़े मुद्दों पर निरंतर, तथ्यपरक और जनोन्मुख संवाद समय की आवश्यकता है।
वक्ताओं ने कहा कि आज विकास, पर्यावरण और स्थानीय समुदायों के हितों के बीच संतुलन स्थापित करना सबसे बड़ी चुनौती है। इसके लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज, शोध संस्थानों, नीति निर्माताओं, मीडिया और आम नागरिकों की साझा भागीदारी भी आवश्यक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि “हिमालय संवाद” इन विषयों पर सार्थक विमर्श को आगे बढ़ाने तथा विभिन्न पक्षों के बीच संवाद का सेतु बनने का कार्य करेगी।
कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने पत्रिका की पहल का स्वागत करते हुए कहा कि वर्तमान समय में ऐसी पत्रिकाओं की आवश्यकता है जो तात्कालिक घटनाओं से आगे बढ़कर दीर्घकालिक सामाजिक, पर्यावरणीय और विकास संबंधी प्रश्नों को गंभीरता से उठाएँ। उन्होंने कहा कि हिमालय से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय विमर्श में पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाता, जबकि इनके प्रभाव दूरगामी होते हैं। ऐसे में “हिमालय संवाद” जैसी पहल जनजागरण और नीति-स्तर पर सकारात्मक हस्तक्षेप का माध्यम बन सकती है।
समारोह में सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी, पूर्व सूचना आयुक्त योगेश भट्ट, पूर्व कुलपति गढ़वाल यूनिवर्सिटी डा० एस०पी०सिंह, वैज्ञानिक, सामाजिक चिंतक डा० रवि चोपड़ा, पूर्व क्षेत्रीय निदेशक परमाणु खनिज अंवेषण एवं अनुसन्धान संस्थान प्रदीप पाण्डेय, पूर्व डीआईजी श्री एन डी बहुगुणा, पूर्व शिक्षा निदेशक महावीर सिंह बिष्ट, पूर्व अपर शिक्षा निदेशक एस०पी० सेमवाल, पूर्व प्राचार्य डाइट देहरादून डा० राकेश जुगराण, जनकवि अतुल शर्मा, इतिहासकार शीशपाल गुसाईं, सामाजिक चिंतक जगदम्बा मैठानी, डा० रंजना शर्मा, सुश्री गीता गैरोला, गांधीवादी विचारक सुश्री कुसुम रावत , वरिष्ठ पत्रकार अनुपम त्रिवेदी, प्रदेश कांग्रेस उपाध्याय डॉ प्रेम बहुखन्डी, सीपीआई ) के वरिष्ठ नेता एमएल इंद्रेश मैखुरी एवं अतुल सती, वरिष्ठ पत्रकार राहुल कोठियाल, हिमालय इनसाइडर के सम्पादक मनमीत रावत, वरिष्ठ पत्रकार गजेद्र रावत, अतुल बरतरिया, सम्पादक उत्तरजन पत्रिका श्री गुणानंद जखमोला, वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी अमित ओबेरॉय, सदस्य उत्तराखंड भाषा संस्थान डॉ दिनेश शर्मा, युवा इतिहासकार रविंद्र गुसाईं, वरिष्ठ पत्रकार त्रिलोचन भट्ट, जयदीप सकलानी, अम्बुज शर्मा, संगीत अकादमी पुरस्कार से सम्मानित डा० राकेश भट्ट, भारतीय ज्ञान विज्ञान समिति के श्री विजय भट्ट, एडवोकेट चंद्रकला, समय साक्ष्य के सम्पादक प्रवीण भट्ट, सुश्री उमा भट्ट, वरिष्ठ पत्रकार आलोक प्रभाकर, श्रीमती अर्चना बहुगुणा, श्रीमती कल्पना बहुगुणा, वरिष्ठ पत्रकार अरविन्द शेखर, पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष (राजकीय शिक्षक संघ) राम सिंह चौहान, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ योगेश धस्माना, सुश्री तनुजा जोशी, डॉ नीलम पाण्डेय, गांधीवादी विचारकर्मी अरण्य रंजन, मीनाक्षी घिल्डियाल, पूजा चमोली जी एवं कई युवा लेखक, पत्रकार, शोधार्थी, कवि सहित लगभग 150 शुभचिंतक,मित्र, सहकर्मी सहधर्मी उपस्थित थे।
कार्यक्रम का संचालन श्री विजयपाल रावत ने किया।
