पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ आरके मिश्रा को ज्ञापन सौंपा
देहरादून। उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों के विभिन्न क्षेत्रों में जंगली जानवरों के बढ़ते हमलों की रोकथाम को कांग्रेस ने हल्ला बोला है। इसी कड़ी में आज आक्रोशित कांग्रेसजनों ने राजपुर रोड स्थित वन मुख्यालय का घेराव किया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जमकर प्रदर्शन किया।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल की अगुवाई में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने जैसे ही दिलाराम चौक से वन भवन के लिए मार्च किया तभी वहां मौजूद पुलिस ने वन भवन के गेट को बंद करके कांग्रेसियों को अंदर जाने से रोक दिया। इस दौरान गेट खोले जाने को लेकर कांग्रेसी कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच जमकर धक्का मुक्की हुई। जिसके बाद कांग्रेसी जबरन गेट खोलकर वन भवन परिसर में घुस गए। सभी ने सरकार व वन विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि वन विभाग और राज्य सरकार इस गंभीर मुद्दे पर उदासीन रवैया अपनाए हुए है। उन्होंने कहा कि जंगली जानवर रिहायशी इलाकों में घुसकर लोगों पर हमला कर रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों में डर का माहौल बना हुआ है। किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं, और पशुधन की भी हानि हो रही है।
कांग्रेस ने निम्नलिखित मांगे रखीं:
जंगली जानवरों को रिहायशी इलाकों में आने से रोकना: इसके लिए वन विभाग को प्रभावी कदम उठाने चाहिए, जैसे कि वन सीमाओं पर बेहतर सुरक्षा व्यवस्था, जंगल के भीतर जानवरों के लिए पर्याप्त भोजन-पानी की व्यवस्था करना, और वन्यजीव गलियारों को सुरक्षित रखना।
प्रभावितों को उचित मुआवजा: जंगली जानवरों के हमलों में जान-माल की हानि होने पर पीड़ितों को तत्काल और पर्याप्त मुआवजा दिया जाना चाहिए। मुआवजे की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जाना चाहिए।
मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए दीर्घकालिक रणनीति: वन विभाग, स्थानीय लोगों, और विशेषज्ञों के साथ मिलकर मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए एक व्यापक और दीर्घकालिक रणनीति बनाई जानी चाहिए। इसमें वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय समुदायों की आजीविका सुरक्षा को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
जागरूकता अभियान: लोगों को जंगली जानवरों के व्यवहार और उनसे बचने के तरीकों के बारे में जागरूक करने के लिए नियमित रूप से अभियान चलाए जाने चाहिए।
कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। उन्होंने कहा कि जंगली जानवरों के आतंक से जनता को मुक्ति दिलाना सरकार की जिम्मेदारी है, और इस मामले में कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह घेराव इस बात का संकेत है कि जनता इस मुद्दे पर सरकार की निष्क्रियता से नाराज है और अब चुप नहीं बैठने वाली है।
पहाड़ों में लोगों को भालू गुलदार जैसे जानवरों के हमले से बचाने के लिए दीर्घकालिक सुरक्षा की मांग की। उन्होंने प्लास्टिक की गन लहराकर वन विभाग के अधिकारियों को चेताया कि वन विभाग अतिशीघ्र लोगों को जंगली जानवरों से निजात दिलाये, अन्यथा प्रभावित ग्रामीण आबादी में घुस रहे खूंखार जंगली जानवरों के खिलाफ बंदूक उठाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
उन्होंने कहा राज्य के विभिन्न पर्वतीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में हाल ही के दिनों में जंगली जानवरों, विशेष कर भालू एवं बाघ के हमले की घटनाएं तेजी से वृद्धि हुई है। इन घटनाओं के कारण आम नागरिकों के साथ-साथ पशुपालकों और जंगलों में लकड़ी, चारा पत्ती आदि के लिए जाने वाले स्थानीय निवासियों विशेषकर महिलाओं में असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। पिछले लगभग 6 माह से ग्रामीण शेत्रों से लगातार ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं। जिनमें भालू के हमले से गंभीर घायल होने, बाघ के शिकार बनने व पालतू पशुओं के मारे जाने की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है।
गणेश गोदियाल ने कहा अकेले पौड़ी और चमोली जिलों में भालू व बाघ ने सैकड़ो पालतू जानवरों को अपना निवाला बनाया है। दूसरी तरफ बाघ और गुलदार के हमले में कई लोगों ने अपनी जान गंवा दी है। इन घटनाओं की वजह से जान माल का नुकसान तो हो ही रहा है बल्कि लोगों की आजीविका पर भी असर पड़ रहा है। कांग्रेस ने अपनी मांगों के संबंध में पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ आरके मिश्रा को ज्ञापन सौंपते हुए प्रभावित क्षेत्रों में भालू और बाघ के मूवमेंट की ट्रैकिंग और मॉनिटरिंग बढ़ाये जाने की मांग की है।
https://jansamvadonline.com/villagers-upset-over-wild-animal-attacks-block-national-highway
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