चुनाव की तारीख और तैयारी
बिहार की सभी 243 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव अक्टूबर या नवंबर 2025 में होने निर्धारित हैं। भारत के चुनाव आयोग द्वारा संचालित होने वाले इस चुनाव में राज्य की राजनीतिक तस्वीर निर्धारित होगी। पिछला विधानसभा चुनाव अक्टूबर-नवंबर 2020 में हुआ था, जिसके बाद से बिहार की राजनीति में कई उतार-चढ़ाव देखे गए हैं।
वर्तमान राजनीतिक स्थिति
बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार की भूमिका केंद्रीय रही है। 2020 के चुनाव के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने सरकार बनाई थी, लेकिन अगस्त 2022 में नीतीश कुमार ने NDA से तोड़कर RJD के नेतृत्व वाले महागठबंधन के साथ सरकार बनाई। बाद में जनवरी 2024 में एक बार फिर नीतीश कुमार ने RJD से संबंध तोड़कर NDA में वापसी की।
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA)
वर्तमान में NDA का नेतृत्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कर रहे हैं। चिराग पासवान ने स्पष्ट किया है कि 2025 के चुनाव के बाद नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री बनेंगे और NDA की एकता बनी रहेगी। हालांकि, BJP के भीतर से आवाजें आ रही हैं कि 2025 के विधानसभा चुनाव में BJP को NDA का नेता होना चाहिए।
महागठबंधन (INDIA गठबंधन)
विपक्ष में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का नेतृत्व तेजस्वी यादव कर रहे हैं, जो पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के पुत्र हैं। तेजस्वी यादव 2020 के चुनाव में महागठबंधन के चेहरे थे, जहां RJD ने 75 सीटें जीतीं – किसी भी एकल दल के लिए सर्वाधिक – और NDA को हार के कगार पर पहुंचा दिया था। तब से तेजस्वी की लोकप्रियता, विशेष रूप से युवाओं के बीच, काफी बढ़ी है।
मुख्य मुद्दे और चुनौतियां
आर्थिक और सामाजिक मुद्दे
2025 के चुनाव वर्तमान राज्य और केंद्र सरकार की शासन व्यवस्था पर जनमत संग्रह की तरह होंगे। बिहार में JD(U) और BJP के गठबंधन को युवाओं की बेरोजगारी, बुनियादी ढांचे की कमी और बढ़ती महंगाई जैसे मुद्दों पर नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
महिला आरक्षण की नीति
8 जुलाई 2025 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने राज्य सरकारी पदों में महिलाओं के लिए 35% क्षैतिज आरक्षण के विस्तार को मंजूरी दी, जो केवल राज्य के स्थायी निवासियों (डोमिसाइल धारकों) के लिए है। यह निर्णय चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
चुनावी रणनीति और संभावनाएं
NDA की रणनीति
NDA का मुख्य दांव नीतीश कुमार के अनुभव और विकास के मुद्दे पर है। गठबंधन का दावा है कि बिहार में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। हालांकि, BJP और JD(U) के बीच सीट बंटवारे को लेकर तनाव दिखाई दे रहा है।
महागठबंधन की रणनीति
सूत्रों के अनुसार, गठबंधन आगामी चुनाव के लिए तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद के चेहरे के रूप में प्रस्तुत करने पर सहमत हो सकता है। महागठबंधन का मुख्य फोकस युवाओं, महिलाओं और पिछड़े वर्गों पर है। RJD की सामाजिक न्याय की राजनीति और तेजस्वी की युवा छवि इसकी मुख्य ताकत है।
चुनावी गणित और प्रभावशाली कारक
जातीय समीकरण
बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यादव, कुर्मी, कोइरी, दलित और अत्यंत पिछड़ा वर्ग के वोट बैंक का बंटवारा चुनाव के नतीजे तय करेगा। NDA का दांव उच्च जातियों, कुर्मी, दलितों के एक हिस्से और अत्यंत पिछड़े वर्ग पर है, जबकि महागठबंधन मुख्यतः यादव, मुस्लिम और दलितों के बड़े हिस्से पर निर्भर है।
क्षेत्रीय कारक
उत्तर बिहार, दक्षिण बिहार और मध्य बिहार में अलग-अलग राजनीतिक समीकरण हैं। मिथिलांचल क्षेत्र में JD(U) की पारंपरिक मजबूती है, जबकि मगध क्षेत्र में RJD का प्रभाव अधिक है।
राष्ट्रीय प्रभाव
तेजस्वी यादव के नेतृत्व में INDIA गठबंधन की बढ़ती ताकत के साथ, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि NDA इस स्थिति में नहीं है कि वह 2019 के लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन को दोहरा सके, जहां उसने 40 में से 39 सीटें जीती थीं।
बिहार का चुनाव केवल राज्य की राजनीति को प्रभावित नहीं करेगा बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी इसके दूरगामी परिणाम होंगे। यदि NDA को झटका लगता है तो इससे केंद्र की राजनीति भी प्रभावित हो सकती है।
निष्कर्ष
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 राज्य की राजनीति के लिए निर्णायक होगा। एक ओर अनुभवी नीतीश कुमार का नेतृत्व है तो दूसरी ओर युवा तेजस्वी यादव की बढ़ती लोकप्रियता। विकास बनाम सामाजिक न्याय की लड़ाई में जनता का फैसला ही अंतिम परिणाम तय करेगा।
चुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आएगी, राजनीतिक गतिविधियां और तेज होंगी। दोनों गुटों के लिए यह चुनाव न केवल सत्ता की लड़ाई है बल्कि बिहार के भविष्य की दिशा तय करने का मामला भी है। युवाओं की बेरोजगारी, महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दे इस चुनाव में केंद्रीय भूमिका निभाएंगे।
