देश के प्रथम गांव माणा स्थित सरस्वती मंदिर में मानव मूर्तियों को हटाने और मंदिर को श्री बद्रीनाथ- केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) को हस्तांतरित कराने के लिए लम्बे समय से संघर्षरत भैरव सेना ने अब बीकेटीसी के पूर्व मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) बीडी सिंह विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है। भैरव सेना के केंद्रीय अध्यक्ष संदीप खत्री ने प्रधानमंत्री को प्रेषित ज्ञापन में बीडी सिंह पर कई आरोप लगाए हैं। ज्ञापन की प्रति प्रदेश के राज्यपाल व मुख्यमंत्री के अलावा प्रवर्तन निदेशालय को भी भेजी गयी है
देहरादून, 26 जुलाई स्थित एक संगठन भैरव सेना ने श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के पूर्व मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) बीडी सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए एक जांच की मांग की है। संगठन ने प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को एक ज्ञापन भेजकर बीडी सिंह के कार्यकाल और उनकी संपत्ति की विस्तृत जांच कराने का अनुरोध किया है।
मुख्य आरोप निम्नलिखित हैं:
- नियम विरुद्ध लंबी तैनाती: बीडी सिंह, जो एक वन सेवा अधिकारी थे, प्रतिनियुक्ति के नियमों के खिलाफ लगभग दस वर्षों तक बीकेटीसी के सीईओ पद पर बने रहे, जबकि यह अवधि अधिकतम पांच वर्ष हो सकती है।
- अधिकारों का दुरुपयोग: आरोप है कि उन्होंने सीईओ के सीमित अधिकारों से बाहर जाकर कई ऐसे कार्य किए जिनके लिए वे अधिकृत नहीं थे।
- अवैध नियुक्तियां और वित्तीय अनियमितता: उनके कार्यकाल में बड़ी संख्या में अवैध रूप से स्थायी व अस्थायी कर्मचारियों की भर्ती की गई और उन्हें नियम विरुद्ध पदोन्नति दी गई। साथ ही, मंदिर समिति के धन को खुर्द-बुर्द करने और समिति की भूमि व संपत्ति को बिना उचित प्रक्रिया के लीज पर देने का भी आरोप है।
- पुनः नियुक्ति का प्रयास: भैरव सेना ने यह भी आरोप लगाया है कि सीईओ पद से हटने और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेने के बाद, बीडी सिंह अब अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर सलाहकार जैसे किसी पद पर फिर से बीकेटीसी में नियुक्त होने की कोशिश कर रहे हैं।
भैरव सेना ने कहा है कि जब प्रधानमंत्री के नेतृत्व में दोनों धामों का विकास हो रहा है, तब ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी आवश्यक है ताकि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था बनी रहे।
