नैनीताल, रामपुर तिराहा कांड मामले में उच्च न्यायालय में याचिका खारिज होने पर “चिन्हित राज्य निर्माण सेनानी संगठन” ने गहरी निराशा व्यक्त है। समिति ने अब अधिवक्ताओं द्वारा इस मामले की पैरवी के लिए संगठन बनाने पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब मामला हाई कोर्ट में था तो किसी अधिवक्ता ने पैरवी क्यों नहीं की, अब संगठन खड़ा कर निजी स्वार्थों की पूर्ति की जा रही है। संगठन ने एक स्वर से राज्य आंदोलनकारियों के हित में पूरे प्रदेश में आंदोलन खड़ा करने का संकल्प लिया। साथ ही तय किया गया कि राज्य आंदोलनकारियों के मामलों को लेकर जल्द ही मुख्यमंत्री से मुलाकात की जाएगी नैनीताल हाई कोर्ट ने पिछले दिनों मामले से संबंधित याचिका खारिज करते हुए कहा था कि पूरा मामला अविभाजित उत्तर प्रदेश का है, इसलिए इस पर सुनवाई इलाहाबाद हाई कोर्ट में होनी चाहिए। कोई के इस फैसले को लेकर आर्य समाज भवन में वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी महेश जोशी की अध्यक्षता व संयोजक पान सिंह रौतेला के संचालन में बैठक हुई, जिसमें वक्ताओं ने कहा कि राज्य आंदोलन के दौरान आंदोलनकारियों का सत्ता की शह पर दमन किया गया। 18 साल बीतने के बाद भी राज्य की स्थायी राजधानी तय नहीं हुई। राज्य आंदोलनकारियों को सरकारी नौकरियों में दस फीसद क्षैतिज आरक्षण देने का सवाल अनुत्तरित है। तय हुआ कि अब इलाहाबाद हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की जाएगी। संयोजक रौतेला समेत अन्य ने एक स्वर में राज्य आंदोलनकारियों को राज्य निर्माण सेनानी का दर्जा देने, अलग राज्य आंदोलन के इतिहास को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने, राज्य आंदोलनकारियों को मेडिकल कॉलेजों में उपचार, सरकारी गेस्ट हाउस में सुविधाएं दिलाने, 31 दिसंबर 2017 तक के राज्य आंदोलनकारी चिह्नीकरण के प्रस्तावों पर कार्रवाई करने, एक समान पेंशन देने की मांग की।
बैठक में इंद्र सिंह नेगी, मुनीर आलम सिद्दीकी, शाकिर अली, विजय पंत, बिशन सिंह मेहता, पान सिंह सिजवाली, रमेश पंत, कंचन चंदोला, दीवान सिंह, लक्ष्मी नारायण लोहनी, सुंदर सिंह नेगी, रईस भाई, धर्म सिंह, चंदन सिंह आदि ने विचार रखे।
