देहरादून: 23 अक्टूबर, एक पुरानी कहावत है “09 दिन चले अढ़ाई कोस” यह बात दिनाँक 15 जून 26 से शहीद स्मारक में धरना दे रहे राज्य आंदोलनकारीयों के प्रति नौकरशाहों के रवैये को देख कर बिल्कुल सही साबित होती है।
पिछले 131 दिनों से शहीद स्मारक देहरादून में धरना दे रहे आंदोलनकारियों को कल की कैबिनेट के बाद एक बार फिर निराशा हाथ लगी।
मंच संयोजक अम्बुज शर्मा ने बताया कि अपनी नियुक्तियों की मांग को लेकर 15 जून 2026 से शहीद स्मारक देहरादून में आंदोलनरत पिछले 133 दिनों से धरना दे रहे राज्यान्दोलनकारी व उनके आश्रित 2013 से अपनी नियुक्तियों की प्रतीक्षा कर रहे हैं मगर नौकरशाह हैं कि बहाने बाजी से बाज नहीं आ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि आंदोलनकारियों की मुख्यमंत्री से हुई वार्ता के क्रम में दिनाँक 14 सितम्बर 2026 को मुख्य सचिव आनंदवर्धन एवं गृह सचिव शैलेश बगौली जी से मुलाकात की गई थी। जिसमें यह तय हुआ था कि हमारा मामला अगली कैबिनेट में लाकर एक कैबिनेट की उप समिति बनाई जायेगी। उक्त बैठक के बाद गृह सचिव शैलेश बगौली ने सभी आंदोलनकारियों को आश्वस्त किया था जिसके बाद आंदोलनकारियों ने चल रहा अपना क्रमिक अनशन स्थगित कर दिया दिया था।
लेकिन दुर्भाग्य यह है कि उक्त वार्ता के बाद आज तक सरकार द्वारा 4 कैबिनेट बैठक कर चुकी है मगर आंदोलनकारियों की माँग जस की तस है।
शारीरिक,आर्थिक एवं मानसिक रूप से कमजोर हो चुके है, विवश होकर अगर आने वाली कैबिनेट में हमारी मांगों को नहीं लाया जाता तो सभी आंदोलनकारी सामूहिक रूप से आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर होंगे जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी।
आज धरने को समर्थन देने वालों में प्रशांत तड़ियाल,विकास रावत, वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी श्री खुशपाल सिंह परमार उत्तरकाशी से सुनीता ठाकुर,अंबुज शर्मा,मनोरथ प्रसाद ध्यानी,प्रभात डंडियाल,राम किशन,रेखा शर्मा, गीता नेगी,शान्ति तड़ियाल,विनोद रविन्द्र आदि मौजूद थे।
